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Saturday, August 8, 2015

Iss Baar Ki Eid Ka Chaand

This Hindi poem highlights the scene of a festival Eid in which two social media friends of neighboring countries exchanged the pics of Moon but felt the hate and jealousy too in the picture of Moon.


wood-moon-stars
Hindi Poem – Iss Baar Ki Eid Ka Chaand
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ,
इस बार की ईद का चाँद ………. अपने मुल्क की छवि यहाँ लाया था ।
चाँद उस मुल्क में भी वही था ………. जो इस मुल्क में दिखता है ,
भेजने वाला भी था वैसा ही ………. जैसा इस मुल्क का बंदा है ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
मगर फिर भी मुल्कों का ये बैर ………. नफरत उस चाँद में ले आया ,
उस चाँद की तस्वीर से ही ………. इस दिल का हर एक ज़ख्म हरा हो आया ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
हमने माँगी थी बस एक तस्वीर ………. ये सोच की वहाँ चाँद कुछ बदला सा होगा ,
हमारे खामोश चाँद से ज्यादा ……….वहाँ के चाँद में एक नया जोश होगा ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
मगर जब “ईद मुबारक” का जुमला भी ………. उस मुल्क को ना भाता था ,
तो कैसे भला उस मुल्क का चाँद ………. हमें जोशीला सा नज़र आता था ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
हम मुल्कवासी अक्सर ………. उस मुल्क से नफरत करते हैं ,
वो मुल्कवासी भी अपने मुल्क पे ………. खामखाँ आहें भरते हैं ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
मगर उस मुल्क के चाँद की तस्वीर को ………. जब हमने अपने मुल्क के चाँद की तस्वीर से मिलाया था ,
तो यहाँ का चाँद और वहाँ का चाँद ………. सच पूछें तो , एक दूजे की ही छाया था ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
हम चाँद की तस्वीर माँगकर भी ………. इतना उस चाँद से डरते थे ,
कि इस मुल्क के चाँद को उस मुल्क के चाँद से ………. एकदम जुदा समझते थे ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
इसलिए हमने उन दोनों तस्वीरों को भी ………. अलग-अलग ही दर्शाया था ,
क्योंकि हमारे और उस मुल्क के चाँद में ………. दिलों से ही कितना अंतर पैठाया था ।
इस बार की ईद का चाँद ………. दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ………
उस चाँद को भेजने वाला चाहे ………. हमारा कितना भी हमदर्द बने ,
मगर उस चाँद में हमको ………. हमेशा सूरज जैसा ही तेज लगे ।
इस बार की ईद का चाँद ……… दूसरे मुल्क से यहाँ आया था ,
इस बार की ईद का चाँद ………. अपने साथ एक गहरा दाग और लाया था ॥

Friday, July 31, 2015

Yakub Aur Kalam

This Hindi poem highlights the latest issue of demise of Our Former president "Dr. APJ Abdul Kalam" and the mumbai bomb blast convict Yakub Memon".


याकूब और कलाम ……… दोनों ही थे मुसलमान ,
मगर एक को मिला सम्मान ……… और दूजे को मिला आतंकी नाम ,
एक मिटा गया नफरत धर्मों की ……… और दूजा बढ़ा गया और नफरत अपने कर्मो की ,
एक ने इस मुल्क में कमाया नाम ………. और दूजे ने इस मुल्क को किया बदनाम ।
याकूब और कलाम ……… दोनों ही थे मुसलमान ………
डॉक्टर कलाम ने राष्ट्रपति बन अपनी पहचान बनाई ……… करोड़ों लोगों की नम आँखों से यहाँ विदाई पाई ,
अपने नाम का रच इतिहास वो श्रद्धांजली पा ……… हर बड़ी हस्ती को अपने क़दमों पे झुका ,
जब सुपुर्द ~ए~ ख़ाक में मिल जाने को तशरीफ़ हुए ………. तब ना जाने कितने ही दिलों की दुआओं के तौफ़ीक़ हुए ।
याकूब और कलाम ……… दोनों ही थे मुसलमान ………
याकूब के सुपुर्द ~ए~ ख़ाक को क्या बयाँ करें ……… जिसका जिस्म लावारिश लाशों की तरह घंटों तक भटकता रहे ,
और जब उसके चहेते उसे ले जाने को मातम मनाएँ ……… तब करोड़ों लोग उसके हालातों पर एक जश्न मनाएँ ,
दुआओं से कहीं दूर वो दोजख में भी जगह ना पाए ………. जन्नत नहीं उसके लिए तो हर दरवाज़ा बस बंद नज़र आए ।
याकूब और कलाम ……… दोनों ही थे मुसलमान ………
डॉक्टर कलाम अपने नाम के कई श्यामपट्ट यहाँ लिखवा गए ……… इस जन्मभूमि के क़र्ज़ को मरने के बाद भी चुका गए ,
एक “मिसाइल मैन” बन कर वो हमेशा अमर रहें ……… अपने कर्म से वो अपने धर्म के भेद-भाव को मिटा गए ,
जिस शब्द से अक्सर इस हिन्दुस्तान में रहता है एक भेद-भाव ………. उसी शब्द में छिपे “मुसलमान ” का सच्चा अर्थ वो समझा गए ।
याकूब और कलाम ……… दोनों ही थे मुसलमान ………
याकूब ने ना केवल अपनी पूरी कौम पर दाग लगाया ……… अपितु अपनी आने वाली कौम को ख़त्म करने का एक जाल खुद ही बिछाया ,
हर मुल्कवासी अब उस कौम में एक “आतंकी ” की झलक पाएगा ……… पहले से बदनाम दूसरे मुल्क को भी अब अपना शत्रु ही कह पाएगा ,
याकूब जैसे उदाहरण ढूँढने पर भी ना ढूँढ सकेंगे हम ………. ” जिस थाली में खाया उसी में छेद ” जैसे उपसर्गों से अब उसे गड़ेंगे हम ।
याकूब और कलाम ……… दोनों ही थे मुसलमान ………
ये सब कर्मों की ही है पहचान जिससे एक आत्मा को यहाँ सम्मान मिले ……… ये सब कर्मों की ही है शान जिसमे व्यक्ति विशेष को नया नाम मिले ,
याकूब और कलाम दोनों ही यहाँ अपनी एक अलग पहचान बना गए ……… उनके नाम को साथ लिखते ही देखो मेरे हाथों में भी पसीने आ गए ,
याद रखो कि हर मुल्क, जाति और धर्म से भी ऊपर है सिर्फ एक “व्यक्ति विशेष ” ………. इसीलिए जोड़ा है मैंने इनके नाम को साथ-साथ ताकि दे सकूँ आप सबको एक नया सन्देश ॥

Tuesday, June 9, 2015

Aatankvaad

This Hindi poem highlights the serious issue of society i.e Terrorism which is day by day increasing and diminishing the religious values of Human being. In this poem the poetess is pleading from the supernatural power i.e  GOD to come back in a new incarnate form to finish the same.
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Hindi Poem on Terrorism Issue – Aatankvaad
कहीं कट रहे सर ,
कहीं हो रहे बलात्कार ,
तुम आते क्यूँ नहीं कृष्ण ?
लेकर फिर धरा पर एक नया अवतार ।
कहीं धर्म का हो रहा हनन ,
कहीं अधर्म का हो रहा व्यापार ,
तुम आते क्यूँ नहीं कृष्ण ?
खोलने फिर से ज्ञान रुपी द्वार ।
कहीं मनुष बन रहे राक्षस ,
कहीं राक्षस कह रहे खुद को पालनहार ,
तुम आते क्यूँ नहीं कृष्ण ?
करने राक्षसों का वध फिर से एक बार ।
मैं फिर जनम लूँगा यहीं ,
ऐसा कह कर गए थे तुम पिछली बार ,
तो लेते क्यूँ नहीं अब जनम फिर से ,
करने मासूम जनता का उद्धार ।
कुछ लोग अपनी कौम का हवाला देकर ,
कर रहे हैं भयंकर नरसंहार ,
जिसे देख ह्रदय काँप जाता है ये सोच ,
कि क्या यही है तेरा रचा सँसार ?
कलयुग की कलयुगी रौनक अब ,
पकड़ रही धीरे-धीरे मृत्यु का द्वार ,
देखो तुम्हारी बसाई इस धरा की ,
खोखली होती जाए दीवार ।
जिस “गीता” का उपदेश दिया था तुमने कभी ,
आज उसी “गीता” का हो रहा बलात्कार ,
जब धर्म परिवर्तन को ताक पर रखकर ,
अधर्मी कर रहे अपने धर्म का प्रचार ।
सब धर्मों को सामान भाव से ,
जब भेजा था तुमने यहाँ इस पृथ्वी पर ,
फिर क्यूँ अपने धर्म की दुहाई देकर ,
पापी करने लगे हैं मनमानी अक्सर ।
इसलिए तुम्हें फिर से आना होगा ,
धरकर “कल्कि” का अवतार ,
धर्म-अधर्म का पाठ पढ़ाने उनको ,
जो “गीता” , “क़ुरान”, “बाइबल” , “गुरुग्रंथ” पर लड़ते हर बार ।
कहीं जल रहे हैं तन ,
कहीं मिट रहा है आत्मा का ईमान ,
तुम आते क्यूँ नहीं कृष्ण ?
करने इस जग को एक सामान ।
कहीं बढ़ रहे हैं पाप ,
कहीं मिट रहे हैं पुण्य  ,
तुम आते क्यूँ नहीं कृष्ण ?
करने जग को फिर से एक शून्य ।
कहीं बज रहे हैं जीत के शँखनाद  ,
कहीं करुण ह्रदय से बोले जा रहे संवाद  ,
तुम आते क्यूँ नहीं कृष्ण ?
खत्म करने ये बढ़ता आतंकवाद ॥

Tuesday, June 2, 2015

Bhagoda



This Hindi poem highlights the social issue of a man who after some frustration became fugitive from the society and due to this act He became the laughing one for others. But If this act of fugitive has done for some good act , then He is proud to be called with such adjective.
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Hindi Poem – Bhagoda
लंका में आग लगाने को ,
गर हनुमान बन कर विनाश करना जरूरी हो ,
तो हाँ मैं भगोड़ा हूँ ।
द्रौपदी की लाज बचाने को ,
गर कृष्ण बन कर वस्त्र देना जरूरी हो ,
तो हाँ मैं भगोड़ा हूँ ।
भगोड़ा वो नहीं …………. जो फिर से शस्त्र उठाने को तैयार रहे ,
भगोड़ा वो नहीं  ………. जो सबके सामने पारदर्शिता को प्रस्तुत करे ,
भगोड़ा वो है …………. जो पीठ पीछे अपनों को ही घायल करे ,
भगोड़ा वो है  ………जो दूसरों को लूट-लूट कर अपना ही हमेशा घर भरे ।
एक पद को ठुकराकर गर दूजे पद पर ,
कुछ करने की चाहत से ये दिल आबाद रहे ,
तो हाँ मैं भगोड़ा हूँ ।
बहुत से नासमझों को समझदारी की एक सीख देने से ,
गर ये देश संभल सके ,
तो हाँ मैं भगोड़ा हूँ ।
मेरी बातों को अपने दिल में सब मेरी ही तरह उतारो ,
आओ भगोड़ा बन कर ही मेरी तरह तुम इस देश में भागो ,
गर संभल सके ये देश तुम्हारी भगोड़ेबाजी से ,
तो हाँ हम सब भगोड़े हैं ।
भगोड़ा बनना कोई अपराध नहीं ,
हर भगोड़े के अपने भागने का अंदाज़ एक अलग सही ,
तभी तो मैं भी एक भगोड़ा हूँ ।
मैं कहता हूँ कि कहो मुझे भगोड़ा ,
ये शब्द मुझे और विश्वास दिलाते हैं ,
क्या पता मेरे भागने से ही कुछ मूर्खों की अकल में ,
नए तार झनझनाते हैं ।
समुद्र मंथन में विष पीने को ,
गर शिव बन कर जटाएँ धरना जरूरी हो ,
तो हाँ मैं भगोड़ा हूँ ।
भगोड़ा वो होता है  …………. जो भाग कर तेज़ी से ,
मैदान के एक छोर से ,
फिर घोड़े पर सवार होकर वापस आए ,
उसी मैदान के दूजे छोर से ।
मगर इस बार दूजे छोर पर ,
नए रास्ते उसके समक्ष हों ,
जिस रास्तों को छोड़ने पर नाम “भगोड़ा” उसे कभी दिया था ,
आज वही सब रास्ते उस “भगोड़े” के आगे परस्त हों ।
गर मेरे भी नए रास्ते परस्त करते हैं शत्रुओं को ,
तो सौ बार मैं यही कहूँगा ,
कि हाँ मैं भगोड़ा हूँ  ………हाँ मैं भगोड़ा हूँ ॥

A Message



This Hindi poem highlights the social problem of common mass when they are eager to know the reason behind every good act of a kind person. Through this poem the poetess is highlighting the message which she is giving to the general mass that this is the right way to take some primary step i.e a look ahead from a common man.
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Hindi Social Poem – A Message
लोग पूछते हैं मुझसे ………
कि क्या होगा बोलो इससे ?
जो तुम इस तरह से जनता के बीच जाकर ,
अपनी आवाज़ उठाते हो ,
इन भ्रष्टाचारियों का Sting बनाकर ,
Google पर सबको दिखाते हो ।
लोग पूछते हैं मुझसे ………
कि क्या होगा बोलो इससे ?
जो तुम इस तरह से अपनी जवानी को ,
बुढ़ापे में बदलते जाते हो ,
बिना किसी मेहनताने के ही ,
दिन~ब~ दिन अपनी श्रम शक्ति को यूँही लगाते जाते हो ।
लोग पूछते हैं मुझसे ………
कि क्या होगा बोलो इससे ?
जो तुम आम जनता के ठेकेदार बन ,
अपनी गृहस्थी को समय नहीं दे पाते हो ,
एक आंदोलनकारी की भाँति रोज़ ,
आंदोलन की मुहीम छेड़ सड़कों पर उतर आते हो ।
लोग पूछते हैं मुझसे ………
कि क्या होगा बोलो इससे ?
जो तुम सत्ता के लोभियों को नंगा कर ,
उन्हें आइना दिखाकर मुस्कुराते हो ,
बेवजह ही दुश्मनी उनसे मोल ले ,
आग से रोज़ खेल जाते हो ।
तब मैं सोच में पड़ जाती हूँ ,
अपने देश के लोगों की मानसिकता पर थोड़ा तरस खाती हूँ ,
कि अगर इस तरह की सोच को लेकर के हम जियेंगे ,
तो फिर कैसे भला इस देश की रक्षा करेंगे ?
ये देश हम जैसे लोगों से ही तो आबाद है ,
तभी तो यहाँ पर आज भी स्वराज है ।
अगर इस तरह के सवाल लोग मुझसे उठाएँगे ,
तो बहुत जल्द सब लोग अपने बिल में घुसते नज़र आएँगे ,
तब ना ही कोई तंत्र होगा और ना ही देश स्वतंत्र होगा ,
बस जिसकी लाठी उसकी भैंस जैसे मुहावरे यहाँ जगह बनाएँगे ,
और आम आदमी बिन सोच के ही ……
गुलामी करते-करते अपनी मौत को गले लगाएँगे ।
मैंने तब ठान लिया ,
कि जवाब लोगों को देकर रहूँगी ,
“क्या होगा बोलो इससे” ……
इस बात का उत्तर उनके समक्ष रखूँगी ,
अपने अंतर्मन में ढूँढने एक उत्तर की तलाश ,
मैंने जाग कर गुज़ारी तब अपनी सारी रात ।
सुबह उनके सवालों का जवाब लिए ,
मैं अपनी कलम को चलाने लगी ,
देने को एक सन्देश नया ,
उन्हें अपने सन्देश से लुभाने लगी ,
मैंने कहा ,” सुनो मेरे देशवासियों ,अब सुनो अपनी बात का जवाब “,
शुरुआत हमको ऐसे ही करनी होगी ……आम आदमी से ज़रा हटके ……… कुछ समझे जनाब !!

Friday, May 29, 2015

Homosexuality

This Hindi love poem highlights the pain of two Lovers who are of same sex.Later one of them again make an appeal  to the Govt. to pass the law in which they can legally bound for the other.
colorful rainbow umbrella gay lesbian homosexual symbol
Hindi Love Poem on Homosexuality
चाँद-तारों ने कहा …चलो एक हो जाएँ ,
इस चाँदनी रात में ……हम कहीं खो जाएँ ,
चाँद -तारों की ही तरह  ……देखो दिल बदल रहे ,
पुरुष के संग पुरुष …और औरत के संग औरत बंध गए ।
ये इश्क़ की परिभाषा …. बड़ी होती है अजीब ,
जिसमे दिलों की बात ही  ……… सबसे होती है करीब ,
कौन जाने कि उस युग में भी कभी …होता था ऐसा प्यार ,
फिर क्यूँ कहे हम इस युग में  …कि य़े होता है व्यभिचार ?
दुश्मन है ये ज़माना …… जो हमें रुसवा यूँ करे ,
हम भी है इंसान वही  ……. फिर फर्क क्यूँ करे ?
क़ानून बनाकर ऐसे  …… हमें करता क्यूँ जुदा ?
क्यूँ समझता नहीं वो  ……हमारे दिल की ये व्यथा ?
चाँद-तारों की तरह ……. हमें भी मिलना आ गया ,
एक-दूसरे की रोशनी में ……. घुलना आ गया ,
क्यूँ बेवजह हम इस देश की …जनसंख्या को बढ़ाएँ ?
अच्छा नहीं है जो फिर इस तरह से ……. समलैंगिक हो जाएँ ।
वो खुशबू उसके बदन की ………लगती बहुत हसीन ,
वो जज़बातों की अनोखी कदर ……करती हमें नमकीन ,
एक आग सी जलती बदन में ……. जब वो करीब आये ,
समझो गर गहराई से ……. तो ये भी इश्क़ ही तो कहलाये ।
मगर बात समझेगा वही ……… जिसके ह्रदय में है प्रेम समाया ,
दूसरे के मन में उठते भावों को ……… जिसने अपना बनाया ,
क्या फर्क पड़ता है ……. जो इसमें औरत-मर्द का मेल नहीं ?
जब मर्द ही मर्द को चूमे …… तो फिर किस बात की लगती कमी ?
बहुत दर्द होता है हमें भी … जब दुनियावाले ये सवाल उठाते ,
कि क्यूँ रिश्ता बनाते हो उस साथी से  ……जिसे दुनियावाले अप्रकृतिक बताते ,
अप्रकृतिक अगर ये मिलन होता …… तो चाँद ,तारों के संग कभी ना होता ,
तब सिर्फ चाँद के संग “चाँदनी” होती …. और तारों की भी अपनी कोई “तारिनी” होती ।
इसलिए दरखास्त हम फिर से ……यहाँ क़ानून से करने आये हैं ,
कि एक बार फिर से विचार करो उन प्रेमी युवायों का ……जिनके ज़हन में कई सपने गहराएँ हैं ,
कि “समलैंगिगता” कोई अपराध नहीं ……ये बस दिलों का एक मेल है ,
दो शारीरिक तृष्णाओं का ……य़े अद्द्भुत और अनोखा एक खेल है ॥

Wednesday, April 29, 2015

Kyu rotaa hai Hindustaan ?

This Hindi poem highlights the issue of recent attack by another country and make a pledge to take revenge for there inhuman activity. It also emphasizes the loop-holes like weak political system

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Hindi Poem on Recent Atttack – Kyu rotaa hai Hindustaan ?
(Note: Image does not illustrate or has any resemblance with characters depicted in the story)

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
अभी तो कटे तेरे सिर्फ पाँच जवान ,
बढ़ने दे इसकी शहादत को अभी और ,
ताकि रच सके इतिहास में एक और बयान ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
अभी तो बरस आज़ादी के होने दे कुछ और जवान ,
गर इस तरह से ही चलेगा ये देश ,
तो बन जाएगा देख तू फिर से गुलाम ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
वो बँटवारा नहीं वो था ऐसा तूफ़ान ,
जो जब-जब चलेगा नफरत की आँधी लिए ,
तब-तब मिटेंगे यहाँ से रहीम और राम ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
अभी नेतायों ने पहना ही कहाँ वो कफ़न तमाम ,
जिसमे लिपटी थीं आहें उन बेवायों की ,
जिनके अपने शहीद हुए थे सीना तान ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
अभी यहीं पर पढ़नी है फिर से “गीता” और “कुरान” ,
जब कुदरत कहेगी चल मेरे साथ चला चल ,
तब घबराएगा फिर से ये पापी इंसान ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
कुछ तो सन्देश दे अपने देशवासियों के नाम ,
कह दे कि या तो मेरी लाज बचा लो ,
या फिर लुटने दो मेरी अस्मत तमाम ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
तुझे बचाने वाले अब बन गए हैं भक्षक खुले~ए~आम ,
वोटों के लालच में देखो …….
दुश्मन की करें चाकरी …..देकर उन्हें जीवन-दान ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
अभी भी लाखों देशभक्त करते हैं तेरा सम्मान ,
तुझे बचाने खड़े हैं अब हम सब ,
बजा बिगुल करके जंग का एलान ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
मर्दों पर होता नहीं तुझे यकीन अब …..ऐसा जान ,
मैं हैरान होती हूँ जब-जब ये सोच ,
तब-तब बना लेती हूँ एक “नारी सेना” …..लिख कर नए नाम ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
तेरे शहीदों का बदला लेगी अब ये “नारी सेना ” बनाम ,
मर्दानगी अब मर्दों की क्योंकि जाती जा रही है ,
इसलिए अब सीमा में घुस कर मारेगी ये सेना …..उनके भी जवान ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
देख हम सब मिलकर कर रहे हैं ……अब जंग का एलान ,
जिस मुल्क में पहले ही सब ख़तम हो चुका हो ,
आ उसके षड्यंत्रों को भी अब करें नाकाम ।

क्यूँ रोता है हिन्दुस्तान ?
नफरत है मुझे इस “पाक” शब्द से …..ये तू जान ,
पहले रेतेंगे हम उस “शब्द” को बेदर्दी से ,
फ़िर मिटा देंगे उसके “इस” और “तान” ॥

Sunday, March 15, 2015

Hot News In “Sansad”

This Hindi poem highlights about those old aged ministers whose name are indulged in many sex scandals with the young guys and young girls

love rope knot
Hindi PoemHot News In “Sansad”

हमारे देश के नेता भ्रष्ट ,
चखने चले सोम रस ,
उम्र का लिहाज़ तो किया होता ,
कहते हैं हमारे हैं नाती -पोता ।

खुद के मुँह में दाँत नहीं ,
ख्वाइशों में चिकने शबाब कहीं ,
उम्र का चल रहा आखिरी पड़ाव ,
बात करते हैं जवाँ हसीनायों के संग ….बिताने को रात ।

हवस का दिखा रहे ऐसा नंगा नाच ,
नौकरी दिलाने के बदले चाहते एक साथ पाँच ,
बात करते हैं कि “पार्टी” जितायो ,
और जब वो जीत जाए ….तब उसमे “शबाब” की आग लगायो ।

हमने ही दिए थे उन्हें “वोट” ,
ताकि वो खर्चें रोज़ नए नोट ,
अब जब पानी हमारे सर से गुज़रा ,
तब हम सोच रहे हैं विकल्प कोई दूजा ।

पर जितने भी विकल्प हम नए चुनेंगे ,
दो-चार भ्रष्ट तो उसमे जरूर घुसेंगे ,
जिन्हें मिल जायेंगे फिर से पाँच साल ,
तंदूरी मुर्गी और तड़के वाली दाल ।

फिर क्यूँ ऐसे “बुजुर्गों” को ,
हम सीट पर बिठाते हैं ?
जिन्हें कुर्सी का ज्ञान नहीं ,
और वो बस नेता बन इठलाते हैं ।

देश के नेता हों सभ्य ,पढ़े-लिखे और कर्मठ ,
मगर “साठ” के ना हों पार ,
क्योंकि ये “साठ” ही वो उम्र है ,
जब सठिया जाती है उनकी तबियत …नदिया के पार ।

तब ना “मर्द” और ना “औरत” में ,
फर्क उन्हें नज़र आता है ,
बस अपनी कुर्सी के दम पर ,
उनका “वहशी” मन ललचाता है ।

कभी सभायों में पकड़े जाते हैं ….
अपने “मोबाइल” में झाँकती नग्न तस्वीरों के साथ ,
और कभी “सी .डी” बन जाती है ,
उनकी काली करतूतों की सौगात ।

कब तक हम इस तरह के “Sex Scandal” ….अखबारों में पढ़कर ,
दाँतो तले ऊँगली दबाएँगे ,
क्या ये अच्छा नहीं होगा कि ऐसे नेतायों को उम्र भर के लिए ,
जेल की हवा खिलाएँगे ।

इसलिए ऐसी सभी पार्टियों को ,
ये शपथ अभी से लेनी होगी ,
कि “नसबन्दी” के बाद ही नेतायों को यहाँ ,
चुनाव लड़ने की आज्ञा देनी होगी ।

अगर समय रहते नेतायों पर ,
प्रतिबन्ध नहीं लगाया जाएगा ,
तो “देश” की प्रगति से ज्यादा ,
नेतायों की प्रगति से ही “संसद” गर्माया जाएगा ॥

Thursday, March 5, 2015

A Shradhanjali To “Sarabjeet” – A Message For His ASSASSIN

This Hindi poem is tribute to Indian soldier Sarabjeet. Poet is giving warning to those who are responsible for his brutal and barbaric murder.
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A Shradhanjali To “Sarabjeet” – A Message For His ASSASSIN

कायर है दुश्मन देखो …..उसने जीत कर भी क्या जीता ,
हमारा “जीत” ऐसा था ….जिसने सारे देश का है दिल जीता ।

एक और बार नामर्दी की …..सूरत दिखा दी उसने अपनी ,
एक और बार वहशी बन …..हैवानियत दिखा दी फिर अपनी ।

यहाँ हर देशवासी दे रहा है ….तुझको इतनी बद्ददुआएँ ,
ज़रा कलमा पढ़कर देख …..तेरा खुदा भी दे रहा है सदाएँ ।

तू चाल चल-चल कर ….. थक जाएगा ए बदनसीब ,
पर याद रख वो दिन भी आएगा ……कभी मेरे हबीब ।

जब तेरी कौम ~ए ~आवाम  को …..यहाँ हम क़त्ल कर लौटाएँगे ,
एक नहीं …..दो नहीं …..हज़ार प्यादे तुझे दिखलाएँगे ।

तू अपनी जात पर रोएगा तब ….और पूछेगा खुद से ये सवाल ,
कि क्यूँ बन गया था मैं नमक हराम ……करके मासूम को हलाल ।

बहुत बेबस किया तूने मेरे …….देश के उस “जीत” को ,
कभी फुर्सत में हम भी निभाएँगे ……तेरी चलाई इस रीत को ।

इंसानियत को खत्म करने का …..भेज रहा है तू जो पैगाम ,
उस पैगाम से धीरे -धीरे …..बढ़ रहा है जूनून ~ए ~कुर्बान ।

हम खुश हैं तेरी मर्दानगी पे …..जो बिन बादल के बरस रही है ,
कम से कम जब बादल गरजेगा …..तब तो तेरी अंतिम घड़ी है ।

अपने नापाक इरादों से …..तू सालों से जाना जा रहा है ,
तभी तो तेरे नाम का पहला शब्द ……”पाक” होने की दुहाई दे रहा है ।

तू सम्बन्धों और मित्रता की …..बात क्या करता है हमसे ,
अरे तेरे देशवासियों को तो ……हम Delete करते हैं रोज़ Facebook से ।

तेरी ऐसी छवि बन गयी है ….कि तेरे मुल्कवासी भी आज रो रहे हैं ,
कभी Twitter पर ,कभी Orkut पर …..हमसे मित्रता के सपने संजो रहे हैं ।

कसूर उन बेचारों का नहीं …..कसूर तेरे नापाक इरादों का है ,
जो हमारे टुकड़ों पर पल कर आज …..हमी को ऐसे काट रहा है ।

याद रख ये जंग ~ए ~एलान …….तुझे सच में बहुत महँगा पड़ेगा ,
कि जो शब्द हमने आज लिखे हैं …..उन्हें पढ़ कर कल तेरा देश खुद हँसेगा ।

ये श्रधांजलि है मेरी ……मेरे वीर “सरबजीत” के नाम ,
जिसकी शहादत का हिसाब चुकाने …..खड़ा है आज सारा हिन्दुस्तान ॥

Wednesday, March 4, 2015

Definition Of “Juvenile”



Fire Flame Burning
Hindi Poem – Definition Of “Juvenile”

वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जो अपनी माँ के स्तनों को ….आज भी चूस रहा ,
हाँ ,वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जो चेहरे पर दाढ़ी -मूंछे उगा, सर~ए ~आम घूम रहा ।

वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जो पैसे के लिए “बस-कंडक्टर ” बन … काम करता था
हाँ ,वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जो चेहरे से मासूम ….पर एक शैतान की छवि रखता था ।

वही साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जिसने चलती बस में …..एक लड़की की इज्जत को तार-तार किया  ,
हाँ ,याद करो उस साढ़े सत्रह बरस के “Juvenile” को ……
जिसने कामुकता की खातिर …..इतना जघन्य अपराध किया ।

वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जिसको अभी …..रोटी कमाने का ज्ञान नहीं ,
हाँ ,वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जिसकी वेहशियत का …कोई बखान नहीं ।

वही साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जिसको उसकी “उम्र” से है सज़ा ….दी जा रही  ,
हाँ ,वही साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”……
जिसके अपराध को सुन कर …..हर किसी को घृणा आ रही ।

वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
इतिहास में अब ….. एक और नाम रचने चला है  ,
हाँ ,वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
अपने “संविधान ” में लिखे लेख पर …..ज़ोरों से अब हंसने लगा है ।

वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जिसने कल एक “लड़की ” की गहराई को ……बड़ी बर्बरता से नापा था ,
हाँ ,वही साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जिसके किस्से सुनकर …….हर मासूम का ह्रदय काँपा था ।

वही साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जो बहुत जल्द ही …….बिना सज़ा के छूट जाएगा ,
हाँ ,वही साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”……
जो अबकी बार किसी “लड़की” की बजाये ……किसी “लड़के ” पर सवालिया निशान लगाएगा ।

उसी साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile” को …….
पहले उसके माँ के स्तनों से ….. हटाना पड़ेगा  ,
हाँ ,वही साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”….
जिसे उसकी “उमर ” से नहीं ……उसके ” जघन्य अपराध ” से सज़ा का हिस्सेदार ….बनाना पड़ेगा ।

मत कहो ….उस दरिन्दे को “Juvenile” ,
ये एक “Juvenile’ की परिभाषा की …..नयी दलील होगी ,
ये सारे देश की ही नहीं ……
हमारे ‘संविधान” की सबसे बड़ी तौहीन होगी ।

सज़ा दे नहीं सकता ……गर क़ानून …..उसकी “Juvenile” age में ,
तो बदल दो परिभाषा …….”Juvenile” से  “Barbarian ” की ……अपनी “Official File” में ,
वो साढ़े सत्रह बरस का “Juvenile”……गर उठा सकता है डंडा …… रौंदने हुस्न को ,
तो हम भी उठा सकते हैं “तलवार “………काटने उस दरिन्दे को ।।

An Appeal To Delhi Government-
Its Better To punish The “Juvenile” ……
Instead of making His Profile ,
Otherwise The Public will Decide ,
Before passing any “Official Law” File.
Don”t Provoke The Mass……A mass is more dangerous than than the task.

Who Is Corrupt?



God Sun Rise Rays
Hindi Poem on Social Issue – Who Is Corrupt?

“भ्रष्ट” …. देश की जनता है ……या सरकार?
चलो एक बार सोच कर करें, इस सवाल पर भी विचार ।

सरकार अगर करती है घोटाले ….
तो जनता “राष्ट्रीय सम्पत्ति ” को ,करती है अपने हवाले ।

मंत्री अगर अपने दौरे के लिए ,करता खर्च रुपये करोड़ …
जनता भी तो बिन किराए के ,लगाती बसों में सफ़र करने की होड़ ।

सरकार अगर बजट में …कीमतों के दाम बढाती ,
जनता हेरा-फेरी कर ,उन्ही कीमतों को ठिकाने लगाती ।

सरकारी आदमियों के लिए ,”पांच-सितारा ” होटल में ठहरने की व्यवस्थाएँ …..
प्रॉपर्टी डीलर हड़प जाते हैं, सरकारी आवासीय योजनायें ।

सरकार ने बढ़ाए ……बिजली के दाम,
जनता ने तार डालकर मीटर को घुमाया ,चुराने के लिए सरकारी बिजली खुल~ए ~आम।

सरकार ने पार्टियों में किये,दारु -भोजन पर लाखों खर्च …..
जनता ने भी किया ,”मिड-डे -माल ” के लिए मिली राशि को त्रस्त ।

सरकार ने लिया …..”विदेशी ” देशों से उपहार,
‘वृद्धा -पेंशन ” को हड़प लिया ,उच्च वर्ग के लोगों ने रिश्वत के बल पर आर-पार ।

सरकार ने “सब्सिडी” से बनवाये ….अपने कट -आउट विशाल ,
सरकारी अस्पताल में,  मुफ्त दवाईयों की कमी दिखाकर मचा बवाल।

लोकसभा में हो गयी है …. पहले से ही “मत्रियों” के बेटों की बुक सीट,
“रिश्वत” को बढावा देकर जनता पा रही ,सरकारी नौकरियों में सीट ।

जब सरकार और जनता दोनों ही ….. पूरी तरह से भ्रष्ट ,
तो कैसे आएगा …..इस देश में “लोकतंत्र “?

सिर्फ अकेला एक आदमी …..कैसे भ्रष्टाचार को मिटाएगा ?
या तो सरकार के ज़ुल्मों को सहेगा ,या जनता के बहिष्कार को गले लगाएगा ।

जब दोनों ही हैं चोर-चोर, मौसेरे भाई ……
तो “भ्रष्टाचार ” से लड़ने की बात करके ,क्यों उढ़वाएँ जग हँसाई  ?

A Message To all-
Both “Government” and “Public” is Corrupt,
“System” will change when They Both get Trust,
So This fight is going on …….. Untill the Root ends
Save “India” For those  Who are deeply dedicated with Sentiments.