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Thursday, November 26, 2015

Aaa Chhupa Lein Apni Dosti Ko

This Hindi poem highlights the Love of friendship that how the two souls meet and how they hide their friendship from this society to get a peace from it.


आ छुपा लें अपनी दोस्ती को ,
सबकी नज़रों से मेरे यार ,
नगर लग गयी गर इसे तो ,
कम हो जाएगा हम दोनों का प्यार ।

आ बना लें अपनी दोस्ती को ,
सबसे अलग और बेमिसाल ,
जिसमे चाह हो कुछ सीखने की ,
देकर अपना “दिल” विशाल ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सागर और नदिया के ताल ,
भंवर में कहीं डूब ना जाएँ ,
इसलिए हाथ थाम कर चलते हैं चाल ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सपनों का एक रंगीन जाल ,
ख़्वाबों में भी रहता हैं अक्सर ,
एक-दूजे के वजूद का ख्याल ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
दो अनजान मुसाफिरों का संसार ,
जिसमे एक मुसाफिर गर थक जाता है ,
तो दूजा उठाता है उसे होकर सिंह पर सवार ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
रंगों से सजा एक इन्द्रधनुष का तार ,
जिसके हर तार में एक नया गीत है ,
और हर रंग में एक सतरंगी बहार ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
छलकते जाम जैसा एक “नशे” का खुमार ,
जब भी चढ़ जाती है इसके “नशे” की खुमारी ,
तब गिरकर ही मिटता है दोनों का सुकून ~ए~ प्यार ॥

Saturday, November 21, 2015

Chal Ek Kahaani Banke

This Hindi poem highlights wishes of a beloved in which she wanted to get publish as a story as Her Love will remain alive then, when other readers will go through from it.

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Hindi Love Poem – Chal Ek Kahaani Banke
Photo credit: earl53 from morguefile.com
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ,
तू शब्द बने ……. मैं मात्रा उसकी ,
तू पात्र बने …… मैं संवाद उनके ,
तू गर आरम्भ हो ……. तो मैं एक अंत उसका ,
बस हो मगर उसमे …… सिर्फ हम दोनों का किस्सा ,
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ।
उस कहानी में हो …… अपने मिलन की सच्चाई ,
और झूठी-सच्ची ……. कुछ अपनी रुस्वाई ,
थोड़ी पिछले जनम की …… गहरी बातें ,
थोड़ी इस जनम की ……. रूमानी रातें ,
जिसमे बसता हो …… सिर्फ हम दोनों की आँखों का सपना ,
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ।
कहानियाँ अक्सर लोग …… दिलचस्पी से पढ़ते ,
गर होते हैं उनमें ……. कुछ गहरे राज़ दिल के ,
अपनी कहानी में छिपा हो …… एक ऐसा राज़ गहरा ,
जिसमे लगा हो ……. सात तालों का पहरा ,
जुड़ते हो जहाँ …… सिर्फ हम दोनों के रिश्ते घनेरे ,
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ।
तू मेरी कहानी का …… राजा कहलाए ,
मैं उस कहानी की ……. रानी बनूँगी ,
सारी हुकूमत तब …… हम दोनों की होगी ,
जीते जी हम दोनों को …….ये दुनिया पढ़ेगी ,
लिखे जाएँगे तब …… सिर्फ हम दोनों के नामो के अक्षर सुनहरे ,
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ।
उस कहानी का अंत हो …… इतना नशीला ,
कि हर पढ़ने वाला ……. बने और रँगीला ,
हर कोई उसकी …… हक़ीक़त को माँगे ,
उस कहानी के पात्रों से ……. मिलने की ठाने ,
और तब हम दें …… सबको एक सन्देश सुरीला ,
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ।
हम दोनों की कहानी …… सौ सालों तक जिए ,
अपने अधूरे मिलन का किस्सा ……. रोज़ पूरा करे ,
कोई समझ ना सके …… उस कहानी की गहराई ,
जिसमे तुम थे , मैं थी ……. और थी शब्दों की लिखाई ,
ऐसी कहानी को तब …… क्या नाम देंगे ये दुनियावाले ?
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ।
मैंने नाम दिया …… उस कहानी को ” एक एहसास ” ,
जिसमे तुम थे , मैं थी ……. और थी एक मिलने की आस ,
वो आस कभी भी …… पूरी ना हुई ,
वो प्यास सालों तक ……. यूँ ही अधूरी ही रही ,
मगर फिर भी जिया उसमे …… एहसासों का रिश्ता हमारा ,
चल एक कहानी बनके …… छप जाएँ यहाँ हम दोनों ।।

Tuesday, June 30, 2015

Shikwa-Shikaayat To Tab Ho

This Hindi poem Highlights the deep love of two lovers in which they met after a long time but still their love was ever, forever as before.



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Hindi Love Poem – Shikwa-Shikaayat To Tab Ho
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू बेवफा निकले ,
वक़्त की कमी के आगे ………. मैं तुझे क्यूँ कहूँ बेवफा ?
तेरा एक पल के लिए आना ………. आकर के चले जाना ………. अच्छा था , अच्छा था ,
वो मीठी बातों को दोहराना ………. अपनी बेबसी बताना ………. अच्छा था , अच्छा था ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू अलविदा कहे ,
अपने काम की मसरूफ़ियत में ………. तू हरगिज़ नहीं बेवफा ।
दूरियाँ दिलों से नहीं सनम …………. दूरियाँ मनों से बना करती हैं ,
जब अपने मनों में ही नहीं खोट ………. तो दूरियाँ नहीं टिका करती हैं ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू अपने अहम से सर पटके ,
अपने सर को बेबसी में झुकाने से ………. तू कभी नहीं बेवफा ।
इतना ही था काफी …………. कि तू रुका तो सही मेरे लिए दो पल ,
कुछ कहा तो मुझे दो पल ………. कुछ सुना मेरा भी दो पल ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू पलट के ना देखे ,
तेरी “आह” में आज भी गर तड़प है ………. तो फिर तू कैसे है बेवफा ?
वो नज़रों का नज़रों से मिलना …………. वो एक हलकी सी अगन का खिलना ,
वो सावन में लौटी ………. एक फिर से नज़ाकत ………. अच्छी थी , अच्छी थी ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब मेरी साँसों को चलना ना आए ,
तेरे संग चली और तेज़ ये ………. तू सच में नहीं बेवफा ।
मैंने रोका खुद को बहुत …………. मगर तेरे संग जी उठी मैं ,
थोड़ी झूमी गगन में ………. थोड़ी पवन में ………. तुझे याद करके सनम ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू जाने लगे मुँह फेर के ,
अपनी बातों के संग गुदगुदाने पर मुझे ………. मैं कहती नहीं तुझे बेवफा ।
ना तू बिलकुल था बदला ………… ना मैं ही थी बदली ,
फिर भी है गर दूरी ………. तो समझो मजबूरी ………. मत करो इतनी जल्दी ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू मेरे हर कदम पर कदम कुचले ,
मुझे फिर से बुलाने का ………. तू ढूँढे बहाना ………. तू सच में नहीं है रे बेवफा ।।

Tuesday, June 2, 2015

Thanx To Your Company



This Hindi poem highlights the importance of pure Love in which the beloved converted Her Lovers company into some name and fame. She admitted that She made Herself so strong in Her Lover’s presence that after that when She wrote the same in Her writings then the unknown people too thanked Her for Her great work.
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Hindi Poem – Thanx To Your Company
मैंने तेरे साथ को सहारा बना  …… खुद को इतना बुलंद किया ,
कि अनजान चेहरे भी करते हैं अब  …… मेरे लेखों का शुक्रिया ।
उन्हें ये इल्म भी होता नहीं  …… कि इसमें छिपी है तेरी कोई ग़ज़ल ,
मगर वो फिर भी करते रहते हैं  ………. मेरी हर उम्मीद को सफल ।
मुझमे एक हौसला ~ए~ हिम्मत भरने की  ……… जो किरण तूने थी दिखाई ,
उस किरण से ही मेरे अंदर है  ……… एक सोच नई समाई ।
उसी सोच को मैंने आगे बढ़ा  ………. खुद को इतना बुलंद किया ,
कि अनजान चेहरे भी करते हैं अब  …… मेरे लेखों का शुक्रिया ।
साथ किसी का मिलता है अगर  ……… चाहे दो पलों के लिए ,
तो समझदार लोग उसी साथ में ढूँढ  लेते हैं ………. ज़िंदगी के फ़लसफ़े ,
मैंने भी हर बार तेरे साथ से  …… अपने जीने को एक नया रंग दिया ,
कि अनजान चेहरे भी करते हैं अब  …… मेरे लेखों का शुक्रिया ।
अक्सर जब कोई मेरे लेखों को पढ़  ……… देता है मुझे दाद ,
तो मैं अपने मन ही मन ओ जाने जां  ………. करती हूँ तुम्हे याद ,
कि किस तरह से तेरे साथ ने  ………. मुझ पर अपना ऐसा जादू किया ,
कि अनजान चेहरे भी करते हैं अब  …… मेरे लेखों का शुक्रिया ।
मेरी सफलताओं को  ………एक नया जामा पहनाने वाले ,
मैंने अब से किया ये जिस्म और जान  ………. सब तेरे ही हवाले ,
क्योंकि तूने मेरे दिल में बस कर  ……… मुझको इतना बदल दिया ,
कि अनजान चेहरे भी करते हैं अब  …… मेरे लेखों का शुक्रिया ।
तेरे संग बिताए वो कुछ लम्हे  ………. मैंने रख लिए बना अपनी धरोहर ,
जिनको अक्सर मोती बना  …… मैं पिरो देती हूँ किसी माला के अंदर ,
फिर उसी माला को पहना तुझे  …… मैंने अपने जीवन को तरंगित इतना किया ,
कि अनजान चेहरे भी करते हैं अब  …… मेरे लेखों का शुक्रिया ।।

Wednesday, April 29, 2015

An Advice Of Lover

An Advice Of Lover: In this Hindi poem the poetess is calling her Lover once again as she didn’t pay the attention of his words first and submit their Love story in a contest which is published.

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Hindi Love Poem – An Advice Of Lover

कहानियाँ हकीक़त से बयाँ हो …….तो उनमे “दर्द” होता है ,
कहानियाँ दर्द  से बयाँ हो …..तो उनमे “इश्क” होता है ,
“इश्क” और “दर्द” से भरी कहानियाँ ……लिख जाती हैं फलक पर ,
जिनमे “तारों” की टिमटिमाहट का …….हर पल असर होता है ।

मेरी “हकीक़त” से भरी कहानी ……क्यूँ चली है फलक पर छपने ,
मुझे एहसास ही ना था ……कि  उसमे “दर्द” इतना भी होगा ?
मैं ये सोच कर हैरान हूँ ……कि “हकीक़त” ऐसे रंग लाएगी ,
जिस कहानी को मैंने एक “Contest” बनाम भेजा ……वही मुझे इनाम~ए~इश्क़ ऐसा दे जाएगी ।

उस “कहानी” में था …….मेरी हकीक़त का “राजकुमार” ,
उस “कहानी” में था …….मेरा अधूरा सा संसार ,
उस “कहानी” में थी ……..मेरी एक तरफ़ा तड़प ,
उस “कहानी” में था …….मेरी शोखियों का खुमार ।

उस “कहानी” में थी …….मेरे बहकते क़दमों की भनक ,
उस “कहानी” में था ……..कहीं धोका तो कहीं प्यार ,
उस “कहानी” में था ……..एक अनजाना सा सफ़र ,
उस “कहानी” में था ……..कहीं एक सचमुच का प्यार ।

वो मेरी जिंदगी का सच था …….जिसे मैंने कागज़ पर शब्दों में उतारा था ,
वो मेरी जिंदगी का सच था …….जिसको पढ़ने पर एक तूफ़ान आने वाला था ,
वो मेरी जिंदगी का सच था ……..जिससे अब मैं डरने लगी थी ,
कि क्यूँ उसे एकं “कहानी” बना ……मैंने अपना ही अक्स उसमे …….इस तरह उतारा था ।

मगर “कहानियों” में अक्सर …….दिलों का मिलन हो जाता है ,
उसमे कहीं एक “आलेख” तो कहीं एक “पाठांतर” ……किताब के अंत में छप जाता है ,
तो क्या ऐसा “आलेख” …….मेरे भी साथ कहीं जुड़ जाएगा ?
जिसकी शुरुआत में “मेरा” …….और अंत में “उसका” नाम आएगा ।

मुझे फिर से जरूरत है “साथी” तुम्हारी ……तुम आयो मुझे फिर से सँभालो ,
मेरी नासमझी को फिर से अपनी …….समझ के साए तले छुपा लो ,
मैं नादान हूँ …….इसलिए ना समझ सकी थी तब  ……तुम्हारी बातों का इशारा ,
कि “इश्क” करो ऐसे ……कि उसमे ना आने दो ……अपने “आशिक” का कहीं नाम प्यारा ।

तुमने सही कहा था उस दिन कि …….मत लिखो ऐसी “कहानी”…….जो ला दे एक जलजला किताबों में ,
मत लिखो ऐसी “कहानी” ….जो छपा दे तुम्हारा नाम ……फलक के सितारों में ,
सिर्फ कुछ सुनहरे पल बिताओ …..अपने जीवन के मेरे साथ ,
जो छप जाएँ सिर्फ तुम्हारे मन में …….जैसे छपती है एक खुली “किताब” ॥

Thursday, March 5, 2015

A Special Friend

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Hindi Poem on unrequited love – A Special Friend

उसे शौक था कि कोई इंतज़ार करे उसका ,
हम उसके हर शौक का इम्तिहान देते रहे ,
वो जब चला जाता था इंतज़ार करके ,
हम तब उसके इंतज़ार में अपने इंतज़ार को हवा देते रहे ।

वो समझता था कि इस तरह से तोड़ देगा हमारे सब्र को ,
हम अपने सब्र से उसके सब्र को खता देते रहे ,
वो छह घंटे इंतज़ार करके चला जाता था ,
हम बाकी के अठाराह घंटे उसके लिए राह तकते रहे ।

हर नाउमीदी पर जब दिल को ठेस लगती थी ,
हम तब उस ठेस पर अपने ज़ख्मो को और सेते रहे ,
उसने खाई थी गर कसम दर्द देने की ….
तो हम भी उस दर्द में अपनी वफाओं को गश्त देते रहे ।

वो कहता था कि मस्त रहो अपने ख्यालों में ,
उसे क्या पता कि हर मस्ती में …..हम उसके साथ का सच लेते रहे ,
वो बड़ा ज़ुल्म करने चला था …..हम पर ए “ग़ालिब “,
हम उसके ज़ुल्म से भी …..अपनी सोच को ……एक नई गति देते रहे ।

उसने छीन लिया अपने तक पहुँचने का ….हर ज़रिया हमसे ,
हम फिर भी दीवानों की तरह उसको समझते रहे ,
उसके सच और झूठ का …कोई सबूत नहीं था हमारे पास ,
हम फिर भी उसकी नीयत पर …दिलफेंक हँसी हँसते रहे ।

दिल~ओ~दिमाग में वो बस गया …..एक ऐसी चिंगारी बनके ,
कि बारूद भी अब फटने लगा ….उसके नाम का कलमा लिखके ,
शबे रात गुज़र गई …..ये सोचकर मेरे “ग़ालिब “,
कि क्यूँ आया था वो इस तरह ….मेरे जीवन में मेहमान बनके ।

वो कहता है …..उसे इंतज़ार नहीं था …..कल रात मेरा ,
वो फिर भी पूछता है ……मेरे ना आने का कारण …..सवाल लिखके,
उसकी इसी अदा के तो ……कायल हो गए हम शायद ,
कि वो कितना भी बदल जाए ….फिर भी सोचता है हमारे लिए …..”दोस्त” बनके ।

For You Only-
गम ये नहीं है आज भी ….कि तेरा इंतज़ार क्यूँ किया ,
गम ये रहेगा सदा ….कि तेरा इंतज़ार इतना कम क्यूँ किया ?

Wednesday, March 4, 2015

An Intelligent Friend



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Hindi Love Poem – An Intelligent Friend

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

तुम अभी नादान हो ………नादानी न करो ,
मेरी दिल~ए ~बेताबी से यूँ ………बेईमानी न करो ।

मेरी मजबूरी का तुम ……यूँ इम्तिहान न लो ,
इस चढ़ती हुई जवानी को ……कोई नाम न दो ।

मैं रोक नहीं पायूँगा ……तुम्हारे लिए उठे जो बहते ज़ज्बात ,
मैं यूँ ही खो जायूँगा ……तुम्हारे साथ दिन और रात ।

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

“वो” कशमकश में इतना ……मजबूर हो चला था ,
एक तरफ हमारी ……..और दूसरी तरफ अपनी ………हर तस्वीर खो रहा था ।

ये उम्र का था ऐसा सैलाब ………जिसमे हर कोई बह जाएगा ,
मैं भी एक इंसान हूँ ……जो तेरे साथ बंध जाएगा ।

तुम जाओ इन रातों से दूर कहीं ……..मत बदनाम मुझको करो ,
मैं इस समय एक आग का शोला हूँ ………..मत हवा इसमें भरो ।

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

मैं भी तड़प रही थी इधर …….उसकी कही हर जुबानी से ,
मैं भी संभल रही थी……उसकी इस परेशानी से ।

कसूर न उसका था………न ही मेरा था उसके लिए पैगाम ,
ये अकेलेपन का था खामियाज़ा …….जो कर रहा था हम दोनों को परेशान ।

ना “वो ” मुझसे मिलता ………ना मैं उसके संग बहती ,
जो इश्क की गर्मी थी ……..वो शायद तब हमारे दरमियान ही रहती ।

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

एक बार को हम दोनों …….बस कर देते सच में नादानी ,
वो एक ऐसी थी कहानी …….जिसमे शब्दों की न थी जुबानी ।

“वो” बार-बार कह रहा था ……..”जाओ ……दूर मुझसे !!” ,
क्योंकि “वो” हर बार सह रहा था ……..लहरों की कशिश मुझसे ।

“वो” कह रहा था ……..मत समझो इश्क में अपनी ……कोई जीत या हार ,
फिर क्यों जिद पर अड़ी थी “मैं”……पाने को उसका प्यार ।

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

“उसकी” मजबूरी पर अब आने लगा था ……मुझे और भी ज्यादा प्यार ,
जो अपनी बेताबी में भी …..चाहता था मेरे हित में ही अपना संसार ।

यूँही बदनाम करता है अक्सर ……”लड़कों” को ये सारा संसार ,
ये सोच मैं चली गयी वहाँ से ……….क्योंकि उस वक़्त मेरा यार था दुनिया में ………सबसे ज्यादा समझदार ।।

Break-Up Party



Boyfriend Taking Mobile Photo of Girlfriend
Hindi Poem – Break-Up Party

“Break -Up Party” बन गया है ……..अब आशिक दिलों का …..वो प्यारा सा नाम,
जहाँ पहले कभी आशिकों को “मजनू” कहकर ……छोड़ देते थे हम सर~ए ~आम ।

लेकिन आजकल तो “मजनू” भी ………अपनी बर्बादी का जश्न मनाते हैं ,
ऐसी ही “Break -Up Party” में …….अपने इश्क को घटिया ताज पहनाते हैं ।

ये कहानी मेरी आपबीती ……..मेरी खुद की ही जुबानी है ,
जहाँ “लैला” तो मैं खुद हूँ ……मगर उसे “मजनू” कहने में ……… मुझे परेशानी है ।

ये किस्सा शुरू हुआ था ……मेरे भी स्कूल के दिनों से ,
जब मेरे लिए लाया था “वो”…..गुलाब का फूल ……अपने घर के बगीचे से ।

उसकी ऐसी भोली सी अदा पर ……मेरा भी दिल …..आ ही गया ,
और हमने भी औरों की तरह ……स्कूल के उन आखिरी दो सालों को ………इश्क में गँवा ही दिया ।

कॉलेज में भी दोनों साथ-साथ ……….एक-दूसरे  के संग ……..प्रेम निभाने लगे ,
दोस्तों के बीच बैठ कर ……..अपने Affair की गाथा को ……हम भी हँस कर सुनाने लगे ।

तीन साल तक यहाँ भी ……..इतनी मदहोशी में दिन बीत गए ,
कि जब होश आया तो समझ आया ………कि मेरे पैरों में बँधे घुंघरू भी टूट गए ।

अब तो बस बाकी बचा था ……मेरे लिए सिर्फ एक चारा ,
कि कैसे भी हो ……”वो” बसा ले मेरे संग ……अपना एक घर प्यारा ।

लेकिन अपनी नादानी को ……..मैंने जैसे ही उसे सुनाया ,
उसने सबके सामने ……मुझसे “Break-Up” करने का फरमान सुनाया ।

मुझे दर्द तो हुआ ……..मगर सँभलने की …..एक और सीख मिली ,
सोचा कि वो सब एक “जुआ” था ……..  जिसको खेलने पर मुझे भी सिर्फ “हार” मिली ।

तभी पता चला …..कि मुझसे “Break-Up” कर ……..वो जश्न मना रहा है ,
कॉलेज की कैंटीन में ……हमारे इश्क के ….किस्से सुना रहा है ।

सोचा कि जाकर देखूँ  मैं भी ……उस “Break-Up Party” का नज़ारा ,
जो अक्सर होने लगी हैं अब ……ऐसे धोकेबाज़ों को बना आवारा ।

वहाँ पहुँच कर मैंने देखा ……..तो मेरे होश उड़ गए ,
जिसे मैं कभी “जान” कहती थी ……उसके लिए हर “जान” के मायने रूठ गए ।

वो बोतल पर बोतल पी ……अपना रौब ज़मा रहा था ,
अपने दोस्तों के बीच बैठा ……….मेरे हर अंग के ……LIVE किस्से सुना रहा था ।

हर लड़का उसकी “Break -Up Party” में …..दाँतो तले ऊँगली दबा रहा था ,
और “वो” उन सबको हँस -हँस कर ………..मेरा Contact Number बता रहा था ।

मैं बहुत जोर से चीखी ……और उसको एक आवाज़ लगाई ,
कि अगर इसे कहते हैं -”Break -Up Party” ……तो तुम सच में हो …..किसी दलाल के भाई ।

तुमसे बेहतर तो  वो पहले ज़माने का “मजनू” था ……जिसके हर अक्स में अपनी “लैला” समायी थी ,
और तुमने तो “Break -Up Party” के बहाने …..अपनी लैला की नग्न तस्वीर ……..अपने दोस्तों को दिखाई थी ।

तुमसे “Break-Up” होने का मुझे ………रत्ती भर भी कोई अफ़सोस ……अब बाकी न रहा ,
क्योंकि मैंने अब भी उसे मजबूर~ए ~हालात समझा ………तुमने जिसे सबको “”Break -Up Party” कहा ।।

An Incomplete Story



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Hindi Love Poem – An Incomplete Story

उसकी लिखी किसी भी कहानी में ………मेरा नाम न आया ,
फिर भी उसके लिखे हर शब्द में …..मैं कहीं न कहीं समाया ।

बिना किसी रिश्ते के …..वो इस कदर ……मेरे दिल~ओ ~दिमाग में छाया ,
कि अब साँसे भी गिनता हूँ ……..तो लगता है …..कि उनमे उसका अक्स है पाया ।

इश्क में अक्सर लोग …..”जिस्मानी जुड़ाव ” के कदरदान होते हैं ,
लेकिन कभी-कभी “मानसिक जुड़ाव” भी ……ऐसे इश्क में अपना नाम सँजोते हैं ।

ये मैंने सिर्फ ……कोरे-कागज़ पर लिखे शब्दों से ….पढ़कर ही नहीं फ़रमाया ,
इस जुड़ाव का एहसास मैंने हर पल …..उसके साथ बिताए लम्हे से अजमाया ।

हम दोनों ही थे …..दो अलग-अलग नावों पर …..सवार हुए नाविक ,
हाथ में पतवार थामे खेमे जा रहे थे ……..अपनी नईया को होकर भावुक ।

सिर्फ एक हल्का सा टकराव …..हमें एक-दूसरे के …..इतने करीब ले आया ,
कि नावें तो वही रहीं ……मगर उनकी पतवार में ……एक बदलाव आया ।

अपनी-अपनी नईया में बैठकर ही ……हम अपने विचारों को ……एक-दूसरे से मिलाने लगे ,
वो उधर से …….और हम इधर से ……एक मीठा सा गीत गुनगुनाने लगे ।

रास्ता हमारा तय था ……मंजिल भी अपने लक्ष्य पर मेहरबान थी ,
बस थोड़ी देर साथ चलने की ………हम दोनों की …..ये खूबसूरत सी “Demand” थी ।

एक ऐसी चाहत ……..जिसमे चारों ओर से ……..हम सुरक्षित थे ,
फिर भी हर सुरक्षा में भी ……अपनी मस्ती में मस्त थे ।

बिना किसी रिश्ते और नाम के ……हम “मानसिक मोहब्बत” की …..डोर में बंधने लगे ,
इश्क ऐसा भी होता है ……..ये सोचकर …..जोर-जोर से हँसने लगे ।

ऐसे इश्क को लोग ……शायद ही कभी समझ पायेंगे ,
क्योंकि इस इश्क में ……..सिर्फ दो आत्मायों के …….दिल ही मिल पायेंगे ।

इसलिए जब भी कभी आपको ये लगने लगे ………कि आप भी ऐसे इश्क के गुलाम हैं ,
तो उस इश्क को एक “कहानी” समझें ………..और उसके कथाकार को ……न कोई नाम दें ।

उसकी लिखी किसी भी कहानी में ……..मेरा नाम आज तक न आया ,
क्योंकि उसकी लिखी हर कहानी को ……मैंने हर पल अधूरा ही पाया ।।