This Hindi poem highlights the Love of friendship that how the two souls meet and how they hide their friendship from this society to get a peace from it.
आ छुपा लें अपनी दोस्ती को ,
सबकी नज़रों से मेरे यार ,
नगर लग गयी गर इसे तो ,
कम हो जाएगा हम दोनों का प्यार ।
आ बना लें अपनी दोस्ती को ,
सबसे अलग और बेमिसाल ,
जिसमे चाह हो कुछ सीखने की ,
देकर अपना “दिल” विशाल ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सागर और नदिया के ताल ,
भंवर में कहीं डूब ना जाएँ ,
इसलिए हाथ थाम कर चलते हैं चाल ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सपनों का एक रंगीन जाल ,
ख़्वाबों में भी रहता हैं अक्सर ,
एक-दूजे के वजूद का ख्याल ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
दो अनजान मुसाफिरों का संसार ,
जिसमे एक मुसाफिर गर थक जाता है ,
तो दूजा उठाता है उसे होकर सिंह पर सवार ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
रंगों से सजा एक इन्द्रधनुष का तार ,
जिसके हर तार में एक नया गीत है ,
और हर रंग में एक सतरंगी बहार ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
छलकते जाम जैसा एक “नशे” का खुमार ,
जब भी चढ़ जाती है इसके “नशे” की खुमारी ,
तब गिरकर ही मिटता है दोनों का सुकून ~ए~ प्यार ॥
आ छुपा लें अपनी दोस्ती को ,
सबकी नज़रों से मेरे यार ,
नगर लग गयी गर इसे तो ,
कम हो जाएगा हम दोनों का प्यार ।
आ बना लें अपनी दोस्ती को ,
सबसे अलग और बेमिसाल ,
जिसमे चाह हो कुछ सीखने की ,
देकर अपना “दिल” विशाल ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सागर और नदिया के ताल ,
भंवर में कहीं डूब ना जाएँ ,
इसलिए हाथ थाम कर चलते हैं चाल ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सपनों का एक रंगीन जाल ,
ख़्वाबों में भी रहता हैं अक्सर ,
एक-दूजे के वजूद का ख्याल ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
दो अनजान मुसाफिरों का संसार ,
जिसमे एक मुसाफिर गर थक जाता है ,
तो दूजा उठाता है उसे होकर सिंह पर सवार ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
रंगों से सजा एक इन्द्रधनुष का तार ,
जिसके हर तार में एक नया गीत है ,
और हर रंग में एक सतरंगी बहार ।
आ कहें अपनी दोस्ती को ,
छलकते जाम जैसा एक “नशे” का खुमार ,
जब भी चढ़ जाती है इसके “नशे” की खुमारी ,
तब गिरकर ही मिटता है दोनों का सुकून ~ए~ प्यार ॥