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Thursday, June 18, 2015

Ye Kaisa Ishq Mera

This Hindi poem highlights the dreamy Love of a beloved in which she was very happy to have such a fantastic Love in which she got each and every enjoyment of Life.


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Hindi Love Poem – Ye Kaisa Ishq Mera
ये कैसा इश्क़ मेरा ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना ,
बस ख्यालों की ही बातें ……… और ख्यालों का अफ़साना ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना….
छूना चाहूँ मैं तुझे पर …… छू ना सकूँ ओ दीवाने ,
खुशबू को पाने तेरी ……… ख्यालों में ही लगूँ ये दिल समझाने ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना…..
तुमने कहा कि तुम जिए …… अक्सर मेरे इंतज़ार में ,
पलकों को तुम्हारी देख कर ……… मैं ढूँढू उसमे छिपे तराने ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना…..
बादलों का शोर सुनकर …… अपने ख्यालों में तुमको लाऊँ ,
उनके बरस जाने पर भीग ……… तेरे संग गुनगुनाऊँ ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना……
धड़कनें जब भी मेरी …… तेरा नाम दिल से पुकारें ,
तेरे आने पर शोर करके ……… ये तेरे संग पल गुज़ारें ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना……
मेरे ख्यालों की भाषा …… सिर्फ तुम्हारे ख्यालों तक जाए ,
कोई और ना उसमे शामिल हो ……… जो मुझमे ऐसी अगन लगाए ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना……
जब भी मन होता मेरा उदास …… मैं तुम्हे अपने दिल से पुकारूँ ,
तुम आते जब मेरे ख्यालों में ……… तो तुम्हारी सौ-सौ नज़र उतारूँ ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना……
मैंने अक्सर हकीकत में ही …… दिलों को टूटते देखा ,
मगर ख्यालों के इश्क़ में ……… नहीं होती है कोई सीमा रेखा ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना……
हकीकत से ज्यादा अब तुमको …… मैं ख्यालों में ही दिल में लाऊँ ,
फिर उन्ही ख्यालों में डूबकर अक्सर ……… तुम्हारे मन को मैं बहलाऊँ ।
ये कैसा इश्क़ मेरा  ………. ना घर है ना ठौर-ठिकाना……
लोग पागल कहते हैं अब …… कहते हैं मुझको दीवानी ,
जो ख्यालों की ही भाषा पढ़ती ……… और ख्यालों में ही बनती रानी ॥

Wednesday, March 4, 2015

A Lover’s Statement


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Romantic Hindi Poem – A Lover’s Statement

जो नहीं हुआ है अब तक …….गर वो हुआ होता ,
तो तू ख्यालों से परे  ……मेरी बाहों में होता ।

तेरे गेसुओं ने गिरकर ……मेरी धडकनों को छुआ होता ,
मैं तुझमें और तू मुझमें ……कहीं छुपा होता ।

जो नहीं हुआ है अब तक …….गर वो हुआ होता ,
तो तू ख्यालों से परे  ……मेरी बाहों में होता ।

तेरे सुर्ख से लबों पर …….मेरे लबों का पहरा होता ,
एक जलती हुई आग होती …….जहां बस धुआँ होता ।

जो नहीं हुआ है अब तक …….गर वो हुआ होता ,
तो तू ख्यालों से परे  ……मेरी बाहों में होता ।

मेरे सीने पर तेरे ……..सर का कब्ज़ा होता ,
तेरे हाथों में मेरे ……कमर का घेरा होता ।

जो नहीं हुआ है अब तक …….गर वो हुआ होता ,
तो तू ख्यालों से परे  ……मेरी बाहों में होता ।

तेरी बेचैनी को मैंने …….अपने जज्बातों में घोला होता ,
तू मचल-मचल कर मेरे ……जिस्म के अन्दर होता ।

जो नहीं हुआ है अब तक …….गर वो हुआ होता ,
तो तू ख्यालों से परे  ……मेरी बाहों में होता ।

तू कशमकश में होकर …..मेरे साथ पिघल रहा होता ,
मैं तेरी चाहत को …….अपने सपनों में पिरोता ।

जो नहीं हुआ है अब तक …….गर वो हुआ होता ,
तो तू ख्यालों से परे  ……मेरी बाहों में होता ।

तेरी हर आह में ……मेरा नाम लबों पर होता ,
मैं उस नाम के साथ ……तुझे जाम बना संजोता ।

जो नहीं हुआ है अब तक …….गर वो हुआ होता ,
तो तू ख्यालों से परे  ……मेरी बाहों में होता ।

तू बनकर मदिरा ……मुझे नशे से जब भिगोता ,
मैं हर चढ़ते हुए नशे में …….तेरे मदिरालय में होता ।

तूने पूछा था मुझसे एक दिन …..गर मेरा साथ तुझे मिला होता ,
तो मैं क्या ऐसा करता …..जो तुझे सबसे अलग लगा होता ।

तेरे जिस्म ~ओ ~जान को तब मैं …….अपने अन्दर इस तरह समोता ,
कि उसमे जो भी रंग भरता ……हर उस रंग में नशा होता ।।