This Hindi poem Highlights the deep love of two lovers in which they met after a long time but still their love was ever, forever as before.
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू बेवफा निकले ,
वक़्त की कमी के आगे ………. मैं तुझे क्यूँ कहूँ बेवफा ?
वक़्त की कमी के आगे ………. मैं तुझे क्यूँ कहूँ बेवफा ?
तेरा एक पल के लिए आना ………. आकर के चले जाना ………. अच्छा था , अच्छा था ,
वो मीठी बातों को दोहराना ………. अपनी बेबसी बताना ………. अच्छा था , अच्छा था ।
वो मीठी बातों को दोहराना ………. अपनी बेबसी बताना ………. अच्छा था , अच्छा था ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू अलविदा कहे ,
अपने काम की मसरूफ़ियत में ………. तू हरगिज़ नहीं बेवफा ।
अपने काम की मसरूफ़ियत में ………. तू हरगिज़ नहीं बेवफा ।
दूरियाँ दिलों से नहीं सनम …………. दूरियाँ मनों से बना करती हैं ,
जब अपने मनों में ही नहीं खोट ………. तो दूरियाँ नहीं टिका करती हैं ।
जब अपने मनों में ही नहीं खोट ………. तो दूरियाँ नहीं टिका करती हैं ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू अपने अहम से सर पटके ,
अपने सर को बेबसी में झुकाने से ………. तू कभी नहीं बेवफा ।
अपने सर को बेबसी में झुकाने से ………. तू कभी नहीं बेवफा ।
इतना ही था काफी …………. कि तू रुका तो सही मेरे लिए दो पल ,
कुछ कहा तो मुझे दो पल ………. कुछ सुना मेरा भी दो पल ।
कुछ कहा तो मुझे दो पल ………. कुछ सुना मेरा भी दो पल ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू पलट के ना देखे ,
तेरी “आह” में आज भी गर तड़प है ………. तो फिर तू कैसे है बेवफा ?
तेरी “आह” में आज भी गर तड़प है ………. तो फिर तू कैसे है बेवफा ?
वो नज़रों का नज़रों से मिलना …………. वो एक हलकी सी अगन का खिलना ,
वो सावन में लौटी ………. एक फिर से नज़ाकत ………. अच्छी थी , अच्छी थी ।
वो सावन में लौटी ………. एक फिर से नज़ाकत ………. अच्छी थी , अच्छी थी ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब मेरी साँसों को चलना ना आए ,
तेरे संग चली और तेज़ ये ………. तू सच में नहीं बेवफा ।
तेरे संग चली और तेज़ ये ………. तू सच में नहीं बेवफा ।
मैंने रोका खुद को बहुत …………. मगर तेरे संग जी उठी मैं ,
थोड़ी झूमी गगन में ………. थोड़ी पवन में ………. तुझे याद करके सनम ।
थोड़ी झूमी गगन में ………. थोड़ी पवन में ………. तुझे याद करके सनम ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू जाने लगे मुँह फेर के ,
अपनी बातों के संग गुदगुदाने पर मुझे ………. मैं कहती नहीं तुझे बेवफा ।
अपनी बातों के संग गुदगुदाने पर मुझे ………. मैं कहती नहीं तुझे बेवफा ।
ना तू बिलकुल था बदला ………… ना मैं ही थी बदली ,
फिर भी है गर दूरी ………. तो समझो मजबूरी ………. मत करो इतनी जल्दी ।
फिर भी है गर दूरी ………. तो समझो मजबूरी ………. मत करो इतनी जल्दी ।
शिकवा-शिकायत तो तब हो ………. जब तू मेरे हर कदम पर कदम कुचले ,
मुझे फिर से बुलाने का ………. तू ढूँढे बहाना ………. तू सच में नहीं है रे बेवफा ।।
मुझे फिर से बुलाने का ………. तू ढूँढे बहाना ………. तू सच में नहीं है रे बेवफा ।।
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