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Thursday, November 26, 2015

Aaa Chhupa Lein Apni Dosti Ko

This Hindi poem highlights the Love of friendship that how the two souls meet and how they hide their friendship from this society to get a peace from it.


आ छुपा लें अपनी दोस्ती को ,
सबकी नज़रों से मेरे यार ,
नगर लग गयी गर इसे तो ,
कम हो जाएगा हम दोनों का प्यार ।

आ बना लें अपनी दोस्ती को ,
सबसे अलग और बेमिसाल ,
जिसमे चाह हो कुछ सीखने की ,
देकर अपना “दिल” विशाल ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सागर और नदिया के ताल ,
भंवर में कहीं डूब ना जाएँ ,
इसलिए हाथ थाम कर चलते हैं चाल ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
सपनों का एक रंगीन जाल ,
ख़्वाबों में भी रहता हैं अक्सर ,
एक-दूजे के वजूद का ख्याल ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
दो अनजान मुसाफिरों का संसार ,
जिसमे एक मुसाफिर गर थक जाता है ,
तो दूजा उठाता है उसे होकर सिंह पर सवार ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
रंगों से सजा एक इन्द्रधनुष का तार ,
जिसके हर तार में एक नया गीत है ,
और हर रंग में एक सतरंगी बहार ।

आ कहें अपनी दोस्ती को ,
छलकते जाम जैसा एक “नशे” का खुमार ,
जब भी चढ़ जाती है इसके “नशे” की खुमारी ,
तब गिरकर ही मिटता है दोनों का सुकून ~ए~ प्यार ॥

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