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Tuesday, October 23, 2018

तुमको महसूस ये दिल नहीं

तुमको महसूस ये दिल नहीं  ........ मेरी जान किया करती है ,
हाँ ये सच है मुझे इश्क़ है तुमसे  ...... बस यही एक किताब ज़ुबाँ पढ़ती है || 

ग़ज़ल लिखते-लिखते

ग़ज़ल लिखते-लिखते  ......  हम खुद ग़ज़ल बन गए ,
मस्ती ही कुछ ऐसी थी  ..... तेरे हर तरन्नुम मेँ ,
शब्दों की जादूगरी  ...... जो सीखी है तुम्हारी बातों से ,
हर शब्द तुम्हारे होठों का  ...... मुझे फिर दीवाना कर गया || 

Friday, September 21, 2018

स्वच्छ संकल्प से स्वच्छ सिद्धि


https://www.youtube.com/watch?v=rD6uyDUkN8w&t=28s


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एक दिन मैंने भी ये संकल्प किया ,
कि स्वच्छ भारत बने अपना ,
भला बिना संकल्प लिए कोई भी ,
सिद्ध हुआ है बोलो किसी का सपना ?

अपने सपने को पूरा करने की अभिलाशा में ,
मैं निकल पड़ी घर से भ्रमण की ओर ,
सबसे पहले पार्क दिखे मुझे ,
जहाँ पड़ा था कूड़ा चारों ओर | 

साफ़ किया उसे मैंने अकेले ,
हुई मेरी खूब जग हँसाई ,
पर देखो मेरे भारत में ,
तभी तो खुशहाली आई | 

फिर रुख किया सड़कों की ओर ,
चुन-चुन वहाँ से पॉलीथीन उठाया ,
कैसे भारतवासी हैं हम ?
जिन्होंने सड़कों पर ही कूड़े का ढेर जमाया | 

उसके बाद दिखी नदियाँ बेचारी ,
कूड़े-करकट के ढेर से हारीं ,
स्वच्छ जल की चाह हम सभी करते ,
पर अपनी नदियों को ही गन्दा करते ?

कल्पना करें उस स्वच्छ भारत की एक बार ,
जहाँ गंदगी का नामो निशान मिटा हो कोसों पार ,
तब विदेशी भी करेंगे फक्र हम पर ,
क्योंकि उन्हें मिलेगा असली स्वर्ग यहीं पर |  

चलो आओ आज आप भी इस संकल्प को धारें ,
कि नए भारत का निर्माण होगा 2022 में हमारे ,
पूर्ण होगा महात्मा गाँधी जी का वह इकलौता सपना ,
जिसे पूरा करने  के लिए लगेगा हर देशवासी अपना || 

~ जय हिन्द 




Thursday, August 23, 2018

फिर से केरल बसाना है ....






फिर से केरल बसाना  है ....
इसे हरा - भरा बनाना है  ,
हुआ बड़ा अनर्थ इसके साथ  ,
बाढ़ ने बहा लिया इसे रातों - रात ,
हमे फिर भी नहीं घबराना  है ,
फिर से केरल बसाना है |

फिर से केरल  बसाना  है .....
जो खो चुके अपना बना बनाया घर ,
ज़िनके कट गए ना जाने कितने पर ?
उन परों को फिर से वहीं सजाना है  ,
उन्हे खुद उड़ने के काबिल बनाना है ,
फिर से केरल बसाना है |

फिर से केरल बसाना है ....
उन सब को आर्थिक रुप से सक्षम बनाना है  ,
हम देंगे उन्हे हर संभव मदद ,
ये हमारे ही तो हैं कहे शबद ,
फिर किस बात का शर्माना है ?
फिर से केरल बसाना है |

Saturday, August 11, 2018

बहकने लगी शमा ...... जलने लगा परवाना

बहकने लगी शमा  ...... जलने लगा परवाना ,
दोनों को था आज  ....... एक साथ नहाना ,
भला इश्क़ में भी होता है  .... कहीं नहाना-वहाना ,
शमा निखार गई देखो  .... बिन पिए पैमाना || 

जिसका वजूद ही बहुत "ख़ास" है

लोग सवाल करते हैं कि  .... "शायरा" बने हम बिन "इश्क़" के कैसे ?
नाम लें भी तो कैसे उसका  .... जिसका वजूद ही बहुत "ख़ास" है || 

मुझे कहने दो आज जी भर


मुझे कहने दो आज जी भर ...  क्या पता कल इस "कश्ती" का ?
हम साथ में बह जाएँ अगर  ...... तो ख़तावार बना कर इस "हस्ती" की मिसाल देना ||